तेनकासी / शेंगोट्टई, 5 नवंबर 2026:*
4 नवंबर की सुबह, जब एक बाघ आरियांकावु और भगवतीपुरम रेलवे स्टेशनों के बीच, पूलानकुडियिरुप्पु के पास रेलवे ट्रैक पार कर रहा था, तो पलक्कड़-थूथुकुडी पलारुवी एक्सप्रेस ने उसे कुचल दिया।
क्या हुआ था?
वन विभाग के मुताबिक हादसा बुधवार सुबह करीब 1 बजे से 2.30 बजे के बीच हुआ। बाघ शेंगोट्टई – आरियांकावु घाट सेक्शन में, तमिलनाडु-केरल बॉर्डर के पास, ट्रैक पार कर रहा था।
बताया जा रहा है कि बाघ एक आम के बगीचे से निकलकर ट्रैक की ओर आया था। ट्रेन की टक्कर से बाघ करीब 50 मीटर तक घसीटता चला गया। उसके सिर में गंभीर चोट लगी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। शरीर के बाकी हिस्सों में सिर्फ हल्की खरोंचें थीं।
मामला कब सामने आया?*
हादसा सुबह करीब 3 बजे सामने आया, जब राहगीरों ने ट्रैक पर बाघ का शव पड़ा देखा। लोको पायलट ने भी RPF को सूचना दी थी। सूचना मिलते ही तेनकासी वन विभाग की टीम, DFO आर. राजमोहन के नेतृत्व में मौके पर पहुंची।
वन विभाग का मानना है कि यह बाघ कलकड़-मुंडनथुराई टाइगर रिजर्व (KMTR) के बफर जोन से आया होगा, लेकिन इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है।
मौके पर ही पोस्टमार्टम के बाद, नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) के प्रोटोकॉल के मुताबिक शव को वहीं जला दिया गया।
वन विभाग ने फॉरेस्ट ऑफेंस केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वन विभाग और दक्षिण रेलवे मिलकर इस बात की जांच कर रहे हैं कि उस इको-सेंसिटिव इलाके में ट्रेन की स्पीड क्या थी।
क्यों है ये घटना अहम?
वन विभाग के मुताबिक तमिलनाडु में ट्रेन की टक्कर से बाघ की मौत की यह पहली घटना है।
पुनालुर-शेंगोट्टई रेल लाइन पश्चिमी घाट के बेहद नाजुक इकोलॉजिकल इलाके से गुजरती है, जहां रात में जंगली जानवरों का ट्रैक पर आना आम बात है। 2025 में वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में भी आरियांकावु के पास सड़क और रेल यातायात को बाघों की आवाजाही में बाधा बताया गया था।
इस घटना के बाद आरियांकावु के आसपास के लोगों में भी डर बढ़ गया है, क्योंकि इलाके में पहले से ही जंगली जानवरों के हमले की घटनाएं बढ़ी हैं।

