धनबाद में कोयला माफियाओं के यहां ED की रेड में 600 करोड़ से अधिक का संपत्ति जब्त।

धनबाद. झारखंड का धनबाद, जिसे ‘ब्लैक डायमंड’ यानी कोयले की राजधानी कहा जाता है. एक बार फिर केंद्रीय जांच एजेंसियों की रडार पर है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने धनबाद में अवैध कोयला खनन, रंगदारी, लेवी वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए शहर के प्रमुख कोयला कारोबारियों और आउटसोर्सिंग ठेकेदारों के 30 से अधिक ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है. इस अभियान में बीसीसीएल (BCCL) के बड़े आउटसोर्सिंग कारोबारी लाल बाबू सिंह (एलबी सिंह) और कोयला व्यापारी अनिल गोयल सहित उनके सहयोगियों के पास से 600 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों व दस्तावेजों का खुलासा हुआ है.

ईडी की रांची जोनल टीम ने जब तड़के धनबाद के सरायढेला, कटरास, झरिया और बैंक मोड़ जैसे इलाकों में एक साथ धावा बोला, तो पूरे कोयलांचल में हड़कंप मच गया. इस दौरान एलबी सिंह के परिसरों से चौंकाने वाली काली कमाई के सबूत मिले हैं. 160 करोड़ रुपये का म्यूचुअल फंड फ्रीज कर दिया गया है. 600 करोड़ रुपये से अधिक की बेनामी संपत्तियां मिली हैं.

छापेमारी में 200 से ज्यादा अचल संपत्तियों जिसमें प्लॉट, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, माइन्स शेयर के मालिकाना दस्तावेज मिले हैं, जिनकी अनुमानित वैल्यू 500 से 600 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है. ठिकानों से 1.02 करोड़ रुपये से अधिक की बेहिसाब नकदी, डिजिटल डिवाइसेज और दर्जनों बैंक खातों के दस्तावेज जब्त किए गए हैं.

इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य अपराध की कमाई से अर्जित संपत्तियों को कुर्क करना है. 600 करोड़ से अधिक का यह जब्ती का आंकड़ा बताता है कि धनबाद का कोयला सिंडिकेट कितना गहरा और जड़ जमा चुका था. धनबाद के इतिहास में ईडी का यह एक्शन कोयला माफियाओं की कमर तोड़ने वाला साबित हुआ है. 600 करोड़ से अधिक की अचल संपत्ति और 160 करोड़ के म्यूचुअल फंड फ्रीज होने के बाद अब जांच एजेंसी उन सफेदपोश नेताओं और नौकरशाहों तक पहुंचने की तैयारी में है, जिनके संरक्षण में यह अवैध कोयला सिंडिकेट दशकों से फल-फूल रहा था.