मेरठ पुलिस ने पिता-बेटे के साइबर फ्रॉड स्कैम का पर्दाफाश किया।जन सेवा केंद्र चलाने वाले दो मौलानाओं को चोरी की ID का इस्तेमाल करके फ़र्ज़ी बैंक खाते खोलने और चोरी का पैसा इधर-उधर करने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया।

मेरठ पुलिस की साइबर सेल और लिसाड़ी गेट थाने की संयुक्त टीम ने हाल ही में फर्जी जन सेवा केंद्र की आड़ में चल रहे एक बड़े साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में पुलिस ने दो मौलानाओं—पिता निजामुद्दीन और पुत्र अकरम (निवासी- अंसार कॉलोनी, गोला कुआं)—को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है

फर्जीवाड़े का तरीका: आरोपी गरीब और अशिक्षित लोगों के फिंगरप्रिंट व पहचान दस्तावेजों का दुरुपयोग करके उनके नाम पर फर्जी आईडी (आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी) बनाते थे।

बैंक अकाउंट का दुरुपयोग: इन्हीं फर्जी दस्तावेजों और जाली मोहरों का इस्तेमाल करके विभिन्न बैंकों में खाते (मुल अकाउंट्स) खुलवाए जाते थे, जिनका उपयोग साइबर ठगी के पैसों को ट्रांसफर और छिपाने के लिए किया जाता था।

भारी बरामदगी: पुलिस ने आरोपियों के पास से अवैध रूप से रखे गए 180 आधार कार्ड, 139 वोटर आईडी, 97 पैन कार्ड, और 92 डेबिट-क्रेडिट कार्ड बरामद किए हैं।

अंतरराज्यीय लिंक: इन खातों में हुए संदिग्ध लेनदेन की शिकायत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज थी, जिससे इस गिरोह के कई राज्यों में फैले होने की आशंका है।

गिरोह का एक अन्य साथी अभी फरार है। पुलिस द्वारा आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), आईटी एक्ट और आधार एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।