बिलासपुर।* शहर में इन दिनों ट्रैफिक पुलिस द्वारा चलाए जा रहे सघन चेकिंग अभियान ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नियमों का पालन कराना अच्छी बात है, लेकिन भारीभरकम चालान की रकम देखकर कई महिलाएं सड़क पर ही फूट-फूटकर रोने लगीं, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
क्या है मामला?
बिलासपुर यातायात पुलिस एसएसपी रजनेश सिंह के निर्देश पर लगातार कार्रवाई कर रही है। पिछले कुछ दिनों में ही नंबर प्लेट पर टेप, पन्नी और स्टीकर लगाने पर 724 वाहनों पर 7.24 लाख से ज्यादा का चालान वसूला गया है। इसी कड़ी में सोमवार को शहर के मुख्य चौराहों पर चेकिंग के दौरान कई महिला वाहन चालकों के भी चालान काटे गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हेलमेट, दस्तावेज और नंबर प्लेट को लेकर ₹2000 से ₹5000 तक के चालान काटे जा रहे हैं। इतनी बड़ी रकम सुनकर कई गरीब परिवार की महिलाएं रोने लगीं और चालान माफ करने की गुहार लगाने लगीं।
सवाल बड़ा है – समाधान क्या है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि –
- सिर्फ चालान से ट्रैफिक नहीं सुधरेगा – शहर में न तो पार्किंग की व्यवस्था है, न ही सिग्नल सही से काम करते हैं।
- जागरूकता जरूरी है – पहले समझाइश और चेतावनी दी जाए, सीधे भारी चालान से गरीब आदमी टूट जाता है।
- सड़कें और अतिक्रमण – सड़कों पर अतिक्रमण और गड्ढों की वजह से भी जाम लगता है, उस पर कोई कार्रवाई नहीं।
ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि नियम सबके लिए बराबर हैं और सड़क हादसों को रोकने के लिए यह कार्रवाई जरूरी है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि चालान की मार सबसे ज्यादा आम आदमी पर पड़ रही है।
R KHULASA का सवाल: चालान काटना जरूरी है, पर क्या मानवीयता और व्यवस्था सुधार के बिना सिर्फ जुर्माने से बिलासपुर का ट्रैफिक सुधर पाएगा?

