यह एक बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला है। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले से पत्रकार पोषराम साहू के साथ कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा मारपीट की खबर निश्चित रूप से लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला है।

यह एक बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला है। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले से पत्रकार पोषराम साहू के साथ कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा मारपीट की खबर निश्चित रूप से लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला है।
यदि एक अधिकारी सवाल पूछे जाने पर इतने हिंसक हो जाते हैं और बीच-बचाव करने वाले वकील को भी नहीं बख्शते, तो यह प्रशासन में जवाबदेही की कमी और बेलगाम व्यवहार को दर्शाता है

पत्रकार की सुरक्षा: पत्रकार का काम सवाल पूछना है, और किसान सम्मान निधि जैसे जनहित के मुद्दे पर सवाल पूछने पर उन पर हमला करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

प्रशासनिक जवाबदेही: मुख्यमंत्री और मंत्रियों के नाम पर अगर निचले स्तर के कर्मचारी इस तरह का आत्मविश्वास (या अहंकार) दिखा रहे हैं, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक नियंत्रण पर सवाल उठाता है।

कानून व्यवस्था: वकील पर हमला यह दर्शाता है कि हमलावर को कानून का कोई डर नहीं था।

इस मामले में संबंधित प्रशासन और पुलिस को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए ताकि पत्रकारों और आम जनता का भरोसा बना रहे। पत्रकार की सुरक्षा और आरोपी पर सख्त कानूनी कार्रवाई अनिवार्य है।

आशा है कि प्रशासन इस पर संज्ञान लेगा।