Toran Kumar reporter/1/3/2026/✍️
Raipur:छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले से एक झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां सर्दी-खांसी का इलाज कराने गई एक 4 माह की गर्भवती महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना पलारी थाना क्षेत्र के ग्राम छेरकाडीह जारा की है। आरोप है कि गांव के ही एक झोलाछाप डॉक्टर, जो वर्तमान में सरपंच भी है, के क्लिनिक में इंजेक्शन लगने के बाद महिला की तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया।
जानकारी के मुताबिक, 22 वर्षीय इंदु साहू (पति अजय साहू) को सर्दी-खांसी की शिकायत थी। वह गुरुवार को गांव के ही कथित डॉक्टर और सरपंच जयंत साहू के क्लिनिक पहुंची थीं। परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, क्लिनिक में उपचार के दौरान अचानक इंदु को उल्टियां होने लगीं और वह बेहोश होकर गिर पड़ी। आनन-फानन में उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पलारी ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे ‘ब्रॉट डेड’ (अस्पताल पहुंचने से पहले मौत) घोषित कर दिया।
बिना डिग्री 17 साल से कर रहा इलाज
हैरान करने वाली बात यह है कि आरोपी जयंत साहू ने खुद स्वीकार किया है कि उसके पास डॉक्टरी की कोई वैध डिग्री नहीं है, फिर भी वह पिछले 17 वर्षों से लोगों का इलाज कर रहा है।
इंदु को सीने में दर्द और बीपी की समस्या थी। वह 15-20 मिनट मेरे पास रुकी, तभी अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी और वह बेहोश हो गई। मेरे पास डिग्री नहीं है, लेकिन मैं लंबे समय से प्रैक्टिस कर रहा हूँ।” — जयंत साहू (कथित डॉक्टर/सरपंच)
संदिग्ध परिस्थितियां: नाक से निकला झाग और खून
महिला की सास कांति साहू ने बताया कि जब वह क्लिनिक पहुंचीं, तो इंदु अपने पति की गोद में अचेत पड़ी थी। अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, महिला के नाक से झाग और खून निकल रहा था, जो किसी गलत दवा या रिएक्शन की ओर इशारा करता है।
कानूनी पेंच: बिना पोस्टमार्टम के अंतिम संस्कार
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि इतनी संदिग्ध मौत के बावजूद पुलिसिया कार्रवाई नहीं हुई।
अस्पताल का पक्ष: पलारी बीएमओ डॉ. पंकज वर्मा ने बताया कि शव दोपहर 2 बजे लाया गया था। परिजन 4 घंटे तक अस्पताल में चर्चा करते रहे और शाम 6 बजे पोस्टमार्टम न कराने का लिखित आवेदन देकर शव ले गए।
परिजनों का रुख: परिजनों ने मामले की कोई शिकायत पुलिस में दर्ज नहीं कराई और गुरुवार रात को ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
दबे पांव दहशत, कैमरे पर चुप्पी
ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि इंजेक्शन लगाने के तुरंत बाद इंदु की हालत बिगड़ी थी, लेकिन सरपंच के रसूख या किसी अन्य दबाव के चलते फिलहाल कोई भी ग्रामीण कैमरे के सामने बोलने को तैयार नहीं है। एक हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया और ढाई साल का मासूम अब अपनी मां के साये से महरूम है।

