छत्तीसगढ़ के बस्तर ब्लॉक के पिपलावंड जामगुड़ा से सामने आई यह तस्वीर (28 अप्रैल 2026) अत्यंत हृदयविदारक है, जहां एक दिव्यांग महिला पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए घिसटकर पानी ढोने को मजबूर है। यह दृश्य कागजों पर चल रही विकास योजनाओं और जमीनी हकीकत के बीच के गहरे अंतर को दर्शाता है, जहां आम जनता का हक अभी भी दूर की कौड़ी है।
अमानवीय दृश्य: महिला अपनी शारीरिक अक्षमता के बावजूद संघर्ष करने को मजबूर है, जो व्यवस्था की नाकामी का आईना है
योजनाओं की हकीकत: सरकार के दावों के विपरीत, दूरस्थ अंचलों में अभी भी बुनियादी सुविधाओं (पानी) का अभाव है।
प्रशासनिक चुनौती: हालाँकि बस्तर में जल जीवन मिशन के तहत कुछ गांवों में नल से जल पहुंचाया जा रहा है, लेकिन अभी भी कई क्षेत्र पानी की गंभीर किल्लत से जूझ रहे हैं।
यह घटना बस्तर के ग्रामीण इलाकों में पानी की उपलब्धता को लेकर हो रहे दावों पर बड़ा सवाल उठाती है।

