झारखंड के बोकारो से 18 वर्षीय पुष्पा महतो 24 जुलाई 2025 को लापता हुई। 9 महीने तक पुलिस उसे खोज नहीं पाई। पीड़ित फैमिली हाईकोर्ट गई। HC ने DGP/SP को तलब किया तो पुलिस ने 24 घंटे में खुलासा

बोकारो: जिले के पिंडाराजोरा थाना क्षेत्र से करीब नौ महीने पहले लापता हुई 18 वर्षीय पुष्पा कुमारी हत्याकांड का सनसनीखेज खुलासा हुआ है. चाकुलिया पंचायत के मधुटांड़ जंगल से पुलिस ने युवती का कंकाल बरामद किया है. यह बरामदगी मुख्य आरोपी दिनेश कुमार महतो की निशानदेही पर की गई. साथ ही थाना प्रभारी समेत 28 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है.

क्या है पूरा मामला

बोकारो के पुलिस अधीक्षक हरविंदर सिंह ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि मृतका पुष्पा कुमारी और आरोपी दिनेश महतो के बीच पिछले तीन वर्षों से प्रेम संबंध चल रहा था. पूछताछ के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया कि पुष्पा लगातार शादी का दबाव बनाए जाने से वह मानसिक रूप से परेशान था और इसी कारण उसने हत्या की साजिश रची.

एसपी हरविंदर सिंह ने बताया कि घटना के दिन पुष्पा कुमारी चास कॉलेज में स्नातक में नामांकन के लिए पहुंची थी. पूर्व नियोजित योजना के तहत दिनेश महतो भी वहां पहुंचा और बातचीत के बहाने उसे कॉलेज के पीछे करीब डेढ़ किलोमीटर दूर सुनसान जंगल में ले गया. जहां उसने चाकू से गोदकर उसकी हत्या कर दी और शव को झाड़ियों में छिपाकर फरार हो गया.

जांच के दौरान आरोपी की निशानदेही पर SIT टीम ने घटनास्थल से मृतका के कपड़े, बालों के अवशेष, हड्डियों के टुकड़े और हत्या में प्रयुक्त चाकू बरामद किया. इस मामले में लापरवाही और संदिग्ध भूमिका सामने आने पर पुलिस अधीक्षक ने पिंडाराजोरा थाना प्रभारी अभिषेक रंजन समेत कुल 28 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. एसपी हरविंदर सिंह ने बताया कि मामले की विभागीय जांच जारी है.

जांच के लिए एसआईटी का गठन

इस घटना को लेकर पुलिस ने प्रेस विज्ञप्ति जारी किया है. प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि जिले के पिंड्राजोड़ा थाना क्षेत्र के खूंटाडीह की रहने वाली रेखा देवी के द्वारा उनकी पुत्री 18 वर्षीय पुष्पा महतो का अज्ञात अभियुक्त के द्वारा अपहरण किए जाने का आवेदन 24 जुलाई 2025 को पिंड्राजोड़ा थाना में दिया गया था.

पुलिस पदाधिकारी के द्वारा उक्त कांड के अनुसंधान के दौरान अभियोजन पक्ष को कमजोर करते हुए अभियुक्त को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से काम किया जा रहा था. इनका जांच करने का तरीका संतोषजनक नहीं था, जिसके कारण मामला संदेहास्पद प्रतीत हुआ. मामले में पिंड्राजोड़ा थाना में पदस्थापित सभी पुलिस पदाधिकारी एवं कर्मियों के द्वारा कांड के खुलासा में अपेक्षित सहयोग नहीं किया गया.

सिटी डीएसपी आलोक रंजन के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया गया, जिसके द्वारा 24 घंटे के अंदर कांड का खुलासा करते हुए अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया एवं उसके निशानदेही पर युवती का शव, कंकाल की हड्डी, पहना हुआ कपड़ा एवं हत्या में प्रयुक्त चाकू को बरामद किया गया.

हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद जांच हुई तेज

विज्ञप्ति में बताया गया कि अन्य सूचना के आधार पर अभियुक्त को बचाने का प्रयास किया गया तथा पैसे के भी लेनदेन की भी बात निकलकर आई एवं अभियुक्त के साथ पार्टी भी किया गया. इसी के आलोक में पिंड्राजोड़ा थाना में पदस्थापित सभी पुलिस पदाधिकारी एवं कर्मियों, आरक्षी, थाना प्रभारी 28 कर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है.