गुरुग्राम के बादशाहपुर में भड़की हिंसा, उपद्रवियों ने दुकानें-गाड़ियां जलाईं; RAF जवानों ने संभाला मोर्चा

Toran Kumar reporter..2.8.2023/✍️

हरियाणा के गुरुग्राम में बीती रात ताजा हिंसा देखी गई है. यहां के खांडसा रोड के पटौदी चौक पर कई मांस की दुकानों, कबाड़ की दुकानों और फर्नीचर मरम्मत की दुकानों पर हमला किया गया, जबकि सेक्टर-70 में कई झोपड़ियों में आग लगा दी गई. हालांकि अग्निशमन अधिकारियों ने दावा किया कि किसी भी घटना में कोई हताहत नहीं हुआ.

बादशाहपुर में फिर भड़की हिंसा
इसी तरह मगंलवार की रात बादशाहपुर में उपद्रवियों ने कम से कम चार भोजनालयों और कबाड़ की दुकानों में आग लगा दी थी. अलग-अलग गाड़ियों में पेट्रोल की बोतलें लेकर आए 200 से ज्यादा लोगों ने उनमें आग लगा दी. पलवल में भी सांप्रदायिक हिंसा फैल गई और 25-30 से अधिक झुग्गियों में आग लगा दी गई. पुलिस ने कहा कि गुरुग्राम के सेक्टर 57 इलाके में एक 26 वर्षीय व्यक्ति की हत्या कर दी गई और एक धार्मिक स्थल को आग लगा दी गई, क्योंकि हिंसा पड़ोसी नूंह जिले से फैल गई.

RAF ने किया फ्लैग मार्च

ताजा घटना के बाद गुरुग्राम पुलिस ने जनता से शहर में कानून व्यवस्था की स्थिति को बाधित ना करने की अपील की है. एसीपी (अपराध) वरुण दहिया ने कहा कि गुरुग्राम में हिंसा की सूचना के बीच पूरे गुरुग्राम में प्रमुख स्थानों पर कई पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है. लोग किसी भी हिंसा के बारे में 112 नंबर डायल करके गुरुग्राम पुलिस को सूचित कर सकते हैं. वहीं हालात नियंत्रण में रखने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स ने (RAF) ने इलाके में फ्लैग मार्च किया.

नंह से शुरू हुई हिंसा
हिंसा और तनाव नूंह जिले में शुरू हुआ, जहां विहिप की रैली आयोजित की गई थी. हिंसा की आग गुरुग्राम में फैलने से पहले एक मस्जिद को रातोंरात जला दिया गया. मंगलवार को गुरुग्राम के बादशाहपुर इलाके में भी दुकानों में आग लगा दी गई. नूंह के व्यापारियों के अनुसार सोमवार को झड़प के दौरान भीड़ ने शिव मंदिर, नल्हड़ मेडिकल कॉलेज, बस स्टैंड, एक साइबर अपराध पुलिस स्टेशन और व्यापारियों की दुकानों पर भी हमला किया.

पुलिस भी भागने पर मजबूर हुई
नूंह अनाज मंडी के व्यापारियों ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार जिले में कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने में विफल रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार समय पर सुरक्षा बलों को तैनात करने में भी विफल रही. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उन्हें अपने जीवन में ऐसी कोई स्थिति याद नहीं है, जहां पुलिसकर्मियों को अपनी जान बचाने के लिए भागने के लिए मजबूर होना पड़ा हो.

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