संजय सिंह की गिरफ्तारी पर संग्राम, ED आज कोर्ट से मांगेगी रिमांड, सीएम केजरीवाल बोले- ‘एक हजार से अधिक छापे मारे, लेकिन…’

Toran Kumar reporter

आप सांसद संजय सिंह (Sanjay Singh) को बीते दिन यानी 4 अक्टूबर को लंबी पूछताछ के बाद ईडी (ED) ने गिरफ्तार कर लिया गया था. उन्हें दिल्ली शराब घोटाला मामले (Delhi Liquor Policy Case) में गिरफ्तार किया गया है. आज (5 अक्टूबर) राउज एवेन्यू कोर्ट (Rouse Avenue Court) में उनकी पेशी होनी है. माना जा रहा है कि ईडी इस दौरान संजय सिंह की रिमांड की मांग करेगी.

बता दें कि, इससे पहले इसी शराब घोटाले से जुड़े मामले में दिल्ली के पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) को गिरफ्तार किया गया था, जोकि कई महीनों से जेल में बंद हैं. दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार साल 2021-22 में नई शराब नीति लेकर आई थी. इस नीति में घोटाले के आरोप लगे थे. दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना (LG VK Saxena) ने इस मामले में CBI जांच की शिफारिश की थी. इसके बाद भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच सितंबर 2022 के अंत में इसे रद्द कर दिया.

AAP और BJP में जुबानी जंग
वहीं, संजय सिंह ने दावा किया कि उन्हें बिना किसी सबूत के गिरफ्तार किया गया और उनकी पार्टी ने कहा कि ईडी की कार्रवाई पूरी तरह से अवैध थी और यह बीजेपी की हताशा दिखाती है क्योंकि वह 2024 का चुनाव INDIA (विपक्षी गठबंधन) से हारने जा रही है.

बीजेपी ने भी आप प्रमुध और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला करते हुए उनपर कथित घोटाले का ‘किंगपिन’ होने का आरोप लगाया और कहा कि उनके लिए भी हथकंडे दूर नहीं हैं.

घर के बाहर लगाया था ईडी से जुड़ा पोस्टर
हालांकि, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मामले के संबंध में कई आरोपपत्र दायर किए हैं, लेकिन कभी भी संजय सिंह को आरोपी के रूप में नामित नहीं किया गया. न ही उन्हें अपना बयान दर्ज करने के लिए बुलाया गया. महीनों पहले सिंह ने एक्स (Twitter) पर एक फोटो पोस्ट की थी, जिसमें वह अपने घर के बाहर खड़े थे. उनके बगल में एक पोस्टर था, जिसमें लिखा था ‘ईडी का फक्कड़ हाउस में स्वागत है.’ इसे बीते दिन भी आप ने रिपोस्ट किया था.

क्या है पूरा मामला?
बता दें कि, शराब नीति मामले की जांच सीबीआई और ईडी दोनों कर रही है. कोरोना काल के बीच दिल्ली सरकार ने दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 लागू की थी. ईडी और सीबीआई ने आरोप लगाया है कि 2021-22 के लिए दिल्ली सरकार की शराब नीति ने गुटबंदी की अनुमति दी और लाइसेंस के लिए रिश्वत देने वाले कुछ डीलरों का पक्ष लिया. भ्रष्टाचार के तमाम आरोपों के बाद इस शराब नीति को रद्द कर दिया गया.

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