Rajasthan Vidhansabha Chunav 2023: राजस्थान में राजपूत पॉलिटिक्स, प्रताप फाउंडेशन ने बीजेपी और कांग्रेस से मांगे अधिक टिकट, देखिए ये खास रिपोर्ट

Neeraj Singh Rajpurohit (Correspondent Jaipur)

जयपुर: राजस्थान में राजपूत समाज सियासत का केंद्र बिंदु है. एक जमाने तक राजस्थान या राजपूताना में राजे रजवाड़ों का ही शासन था. आजादी के बाद लोकतंत्रात्मक राज्य में राजपूत समाज के नेताओं ने चुनाव लड़कर विधानसभा और लोकसभा तक पहुंचने का काम किया. इनमें राजा और महाराजा भी रहे. पिछले विधानसभा चुनावों में राजपूत समाज से बीजेपी ने 26प्रत्याशी चुनावी समर में उतारे और विजयी हुए 10,वही कांग्रेस ने 16उतारे और 8 जीते..दोनों प्रमुख दलों ने 42 राजपूत चेहरों को टिकट दिए थे.

राजस्थान की राजनीति में ऐसा कहा जाता है जनसंघ और बीजेपी की जड़ों को जमाने में राजपूत वर्ग के नेताओं का विशेष योगदान रहा. एक समय भी था जब राजपूत वर्ग से बड़ी संख्या में टिकट दिया जाते थे. लेकिन बीते तीन विधानसभा चुनावों की बात करे तो 2008 से लेकर 2018 तक के चुनावों में तो राजपूत चेहरों को टिकट देने में बीजेपी ने कमी रखी 2008के विधानसभा चुनावों में जहां 29राजपूत नेताओं को टिकट दिए थे तो 2018के चुनावों में 26 राजपूतों को ही कमल का टिकट मिला. 2013के चुनावों में तो गजब हुआ था 28 राजपूत चेहरों को बीजेपी ने टिकट दिए थे और जीत मिली थी 23राजपूत नेताओं को. हालांकि बीते विधानसभा चुनावों में 26राजपूत चेहरों को टिकट मिला बीजेपी का और विजय श्री नसीब हुई 10को ,16 राजपूत नेताओं को पराजय मिली. इनमें अधिकाश वो चेहरे थे जो कांग्रेस के राजपूत चेहरे थे कांग्रेस के राजपूत चेहरों के सामने परास्त हो गए..कोलायत,शेरगढ़,बाली ऐसी ही सीटें रही. निर्दलीय और अन्य दलों से भी दो राजपूत बीते चुनाव में जीते थे. कांग्रेस ने 2008 के चुनावों में 19राजपूत नेताओं को टिकट दिए इनमें से सात जीते. 2013 के चुनावों में 14राजपूत चेहरे कांग्रेस ने उतारे और विजय मिली केवल 2 को ,एक दर्जन राजपूत चेहरे हार गए..बीते विधानसभा चुनावों में यूं कहे 2018 के चुनाव में हाथ के निशान पर 16 चेहरे उतरे और इनमें से 8 को जीत और 8 को हार मिली.

— 2018 के चुनाव और राजपूत समाज के विजय प्राप्त बीजेपी विधायक–

बीकानेर पूर्व से सिद्धि कुमारी

चूरू से राजेंद्र राठौड़

विद्याधर नगर से रणपुर सिंह राजवी नरपत सिंह राजवी

आसींद से जब्बर सिंह सांखला ( रावणi राजपूत )

बाली से पुष्पेंद्र सिंह

सिवाना से हमीर सिंह भायल

रानीवाड़ा से नारायण सिंह देवल

चित्तौड़ से चंद्रभान सिंह आक्या

कुंभलगढ़ से सुरेंद्र सिंह राठौड़

लाडपुरा से कल्पना देवी

आसींद से रावणा राजपूत जब्बर सिंह सांखला जीते थे

–2018 के चुनाव और राजपूत समाज के विजय प्राप्त कांग्रेस विधायक–

कोलायत से भंवर सिंह भाटी

श्रीमाधोपुर से दीपेंद्र सिंह शेखावत

सिविल लाइन से प्रताप सिंह खाचरियावास

बाड़ी से गिरिराज सिंह मलिंगा

शेरगढ़ से मीना कंवर

वल्लभनगर से गजेंद्र सिंह शक्तावत

सांगोद से भरत सिंह कुंदनपुर

जोधपुर शहर से रावणा राजपूत मनीषा पवार ने जी दर्ज की थी

आखिर इस बार राजपूत समाज को मिलेगी कितनी तरजीह ? इसे लेकर सियासी गलियारों में चर्चा हैं..राजपूत समाज कर रहा हैं दोनों ही प्रमुख पार्टियों से मांग. पिछले विधानसभा चुनाव से ज्यादा प्रत्याशियों को टिकट की मांग रखी है. इस बार प्रताप फाउंडेशन ने की दोनों ही दलों से अधिक टिकट मांगे है. इस विधानसभा चुनाव में राजपूत समाज का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की मांग रखी है. प्रताप फाउंडेशन संयोजकमहावीर सिंह सरवड़ी ने भाजपा प्रभारी अरुण सिंह तक पहुंचाई अपनी बातऔर अभी तक की जारी हुई सूची पर जताई नाराजगी और आगामी सूचियों में राजपूत समाज का ध्यान रखने की कही है बात उधर कांग्रेस में भी धर्मेन्द्र राठौड़ के मार्फत शीर्ष स्तर तक पहुंचाई गई अपनी बात धर्मेन्द्र राठौड़ के जरिए कांग्रेस और प्रताप फाउंडेशन दोनों संपर्क में है.

पिछले विधानसभा चुनावों के समय आनंद पाल, चूतर सिंह फैक्टर ,राजमहल पैलेस होटल, पद्मावती फिल्म,मानवेंद्र सिंह का कांग्रेस में जाना समेत कई मसले ऐसे रहे जब राजपूत समाज ने कांग्रेस का साथ दिया था. आनंद पाल जाति से रावणा था लेकिन राजपूत संगठन एनकाउंटर के खिलाफ खड़े हो गए राजपूत – रावना वर्ग एक जाजम पर आ गए. नतीजा यह निकला कि शेरगढ़,कोलायत जैसी सीटों पर समाज ने बीजेपी के बजाय कांग्रेस के राजपूत को वोट दिया. भाटी, राव राजेंद्र सिंह,बाबू सिंह राठौड़ राजपाल सिंह शेखावत सरीखे चेहरे चुनाव हार गए जो जीते वो अपने दम पर. राजस्थान में जमींदारा प्रथा के खिलाफ जब कांग्रेस खड़ी हुई तब राजपूत राजे रजवाड़ों का झुकाव विपक्षी दलों की और रहा. साल 1956में जब राम राज्य परिषद की ओर से करीब 50 राजपूतों ने चुनावों में जीत दर्ज की बेहद कम राजपूत ही कांग्रेस के टिकट पर जीते थे. बहुत कम लोगों को पता है कि बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री और कद्दावर राजपूत नेता भैरों सिंह शेखावत को राम राज्य पार्टी ने 1952में टिकट नहीं दिया था, बाद में उन्होंने जनसंघ का दामन थामा था. आगे चलकर राम राज्य परिषद मिल स्वतंत्र पार्टी में जिसकी अगुवाई जयपुर की राजमाता गायत्री देवी कर रही थी. स्वतंत्र पार्टी का अस्तित्व खत्म हुआ तब राजपूत राजनीति शिफ्ट हुई जनता पार्टी में और आगे चलकर सोहन सिंह मदन सिंह दांता,तन सिंह जैसे कद्दावर नेताओं की अगुवाई में राजपूत जुड़ गये बीजेपी से और राजपूताना में कमल खिला दिया. तन सिंह विधानसभा के पहले नेता प्रतिपक्ष थे.

Leave a Comment