डॉक्टर से आईएएस बनीं रेनू राज गरीबों की मदद के लिए मेडिसिन छोड़कर सिविल सेवा में आईं | उनकी कहानी आपको प्रेरित करेगी

Toran Kumar reporter..15.7.2023/✍️

Success Story : यूपीएससी की परीक्षा काफी कठिन होती है लेकिन कई बार यूपीएससी की परीक्षा पास कर आईएएस आईपीएस बनने का जुनून ऐसा है कि तमाम डॉक्टर्स और इंजीनियर्स अपना जमा-जमाया करियर छोड़कर यूपीएससी की परीक्षा में हाथ अजमाते हैं. आज आपकी मुलाकात एक ऐसी आईएएस अफसर से कराने वाले हैं जो पेशे से सर्जन थीं. उन्होंने बतौर सर्जन काम करते हुए कुछ महीने की तैयारी के बाद यूपीएससी परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में यूपीएसससी टॉप किया. इनका नाम आईएएस रेनू राज है. आइए जानते हैं आईएएस रेनू राज की सक्सेस स्टोरी.

आईएएस रेनू राज मूलत: केरल की रहने वाली हैं. उनकी स्कूलिंग केरल के कोयट्टम में स्थित सेंट टेरेसा हायर सेकेंडरी स्कूल से हुई है. इंटरमीडिएट के बाद उन्होंने कोयट्‌टम के ही गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज से मेडिकल की पढ़ाई की. इसके बाद वह सर्जन बन गईं. उन्होंने साल 2013 में बतौर सर्जन काम करते हुए यूपीएससी की तैयारी शुरू की. कुछ महीने की तैयारी के बाद उन्होंने यूपीएससी सिविल सर्विस एग्जाम पास कर लिया.
केरल कैडर की आईएएस रेनू राज ने अपने पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया सेकेंड रैंक हासिल कर ली थी. डॉ. रेनू राज का नाम देश के सबसे कुशल आईएएस ऑफिसर्स की लिस्ट में लिया जाता है. उनके पिता एक रिटायर्ड कर्मचारी और मां हाउसवाइफ हैं. रेनू की दोनों बहनें भी पेशे से डॉक्टर हैं.
डॉक्टर रेनू राज ने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी के साथ सर्जन के तौर पर काम करना जारी रखा था. वह अपने कई इंटरव्यू में बता चुकी हैं कि वह लोगों के लिए अधिक से अधिक काम करना चाहती थीं. ऐसे में उन्हें ख्याल आया कि वह बतौर डॉक्टर 50 या 100 मरीजों की मदद कर सकती हैं. लेकिन सिविल सेवा अधिकारी बनकर वह एक फैसले से हजारों लोगों की मदद कर सकती हैं. उन्होंने इसके बाद यूपीएससी परीक्षा देने का फैसला किया था.
आईएएस बनने के बाद रेनू राज ने यूपीएससी की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों के लिए टिप्स शेयर किए थे. उन्होंने बताया कि बतौर डॉक्टर काम करते हुए वह हर दिन तीन से छह घंटे पढ़ाई कर लेती थीं. उन्होंने यह शेड्यूल छह से सात महीने तक इस शेड्यूल को फॉलो किया. अप्रैल 2022 में रेनू राज ने आईएएस अधिकारी श्रीराम वेंकटरमण से शादी की. इस जोड़े ने अपनी शादी को सादगी से मनाया और अपने प्रियजनों के बीच सभी रस्में पूरी कीं. श्रीराम वेंकिटरमण ने भी 2012 में यूपीएससी परीक्षा में दूसरी रैंक हासिल की थी.

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