छत्तीसगढ़ में.भीम आर्मी द्वारा भीम आर्मी पाठशाला का भटगांव में किया गया शुरुआत

भीम आर्मी भारत एकता मिशन के संस्थापक मान. ADV चन्द्रशेखर आज़ाद जी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मान. विनय रतन सिंह जी के मिशन को पूरा करते हुए छत्तीसगढ़ के प्रदेश संयोजक
मान. राजकुमार जांगड़े जी के अध्यक्षता में संचालन किया जा रहा है I जिला इकाई सारंगढ़ – बिलाईगढ़ के उप तहसील भटगांव नगर पंचायत में दिनाँक 24-10-2022 से भीम आर्मी पाठशाला का शुरुआत किया गया है l जिसका नेतृत्व जिलाध्यक्ष आपुर बंजारे,, के साथ-साथ अमन अंबेडकर, विजयकुमार सोनवानी , रूपा सोनवानी ,रामशील्ला सोनवानी ,कु जानकी सोनवानी ,राकेश कुर्रे, रवि शास्त्री टण्डन, चौबे लाल टण्डन कर रहे हैं l

स्थान:- विजय कुमार सोनवानी निवास (प्रगति नगर भटगांव)
पाठशाला में उपलब्ध सुविधाएं निम्नानुसार है –
मुफ्त कांपी – पेन , बहुजन महापुरषों की अनेकों पुस्तकें l

शुरुआत में एडिशन हुए बच्चे,,
भावेश, कमल रात्रे, नैंशी बघेल, राधिका टंडन, एलिसिबा टंडन, लोकेश टंडन, शिवम रात्रे, विष्णु कोशले, आदित्य सोनवानी, अल्का रात्रे, आशा सोनवानी, ज्योति सोनवानी, अविका सोनवानी, हिमांशी सोनवानी, अखिलेश सोनवानी, प्रियांशु बघेल, प्रिंश टंडन, विनय कुमार टंडन, विवेक कुमार टंडन, जोरन नारंग l
भीम आर्मी पाठशाला का उद्देश्य “बहुजन समाज के बच्चो को बिना शुल्क लिए शिक्षित करना” l ”लोगों में महापुरुषों का संघर्ष को बताना” l
“शिक्षा को जीवन की महत्वपूर्ण अंग मानकर समाज में गरीब और पिछड़े वर्गों की बच्चों को शिक्षित करना l”
बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने शिक्षा के बल पर ही देश को विश्व का एक सबसे बेहतरीन संविधान दिया और विश्व में ज्ञान के प्रतीक के रूप जाने गए जो कि हमारे लिए एक गौरव की बात है.
“लोग हमसे काबिलियत से जवाब देने के लिए ललकारते हैं। हम उन्हें काबलियत से ही जवाब देंगे। हम अपने बच्चों को इतना काबिल बनाना चाहते हैं कि विरोधी कहीं खड़े न हो।”
“गलत जानकारी बुरे जहर की तरह है। हमें सही बात जानने का हक़ है और अपने ज्ञान का विस्तार करने की जिम्मेदारी भी हमारी है। समाज बहुत पिछड़ा हुआ है और हमें अपने कर्तव्य अहसास है। सही ज्ञान बांटना हमारी जिम्मेदारी है।”
किसी भी भीम आर्मी पाठशाला में किसी भी बच्चे से पढ़ने का कोई पैसा नही लिया जाता। हम अपने बच्चों को अपना गौरवशाली अतीत पढ़ाना चाहते हैं जिसे मनुवादियो ने छिपा दिया है। स्कूलों में दलित बच्चों के साथ भेदभाव होता है। अब हम ‘अपनी किताब, अपना स्कूल’ के सिद्धान्त पर है।”
“लोग हमसे काबिलियत से जवाब देने के लिए ललकारते हैं। हम उन्हें काबलियत से ही जवाब देंगे। हम अपने बच्चों को इतना काबिल बनाना चाहते हैं कि विरोधी कहीं खड़े न हो।”

“”शिक्षा शेरनी का वह दूध है ,जिसको जो जितना पियेगा, उतना दहाड़ेगा””
“”शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो l””

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