11 लाख की कार को रिपेयर कराने के लिए 22 लाख का खर्च, वायरल हुआ एस्टीमेट बिल

किसी सामान को रिपेयर कराने का खर्च आप कितना सोच सकते हैं..कितना भी महंगा सामान हो लेकिन उसको ठीक करवाने या मरम्मत करवाने की कीमत उस सामान से दोगुनी होने का तो कोई लॉजिक ही नहीं बनता है. लेकिन एक ऐसी ही घटना बेंगलुरु में हुई है 11 लाख रुपये की कार को रिपेयर करने का खर्च 22 लाख रुपये बताया गया.

दरअसल कुछ दिन पहले हुई बारिश और उससे होने वाले जलजमाव ने वहां के कई लोगों को भारी नुकसान पहुंचाया. लोगों के घरों में कई दिनों तक पानी भरा रहा. इस जलजमाव में लोगों की गाड़ियां डूब गईं जिससे उनमें कई तरह की दिक्कतें आ गई.

बाढ़ खत्म होने के बाद लोग अपनी कार और बाइक को ठीक कराने के लिए सर्विस सेंटर पहुंचने लगे. इन्हीं में से बेंगलुरु के एक शख्स भी अपनी कार को मरम्मत कराने सर्विस सेंटर ले गए. सर्विस सेंटर ने उनकी कार को पहले तो कई दिन तक सर्विस सेंटर में रखा और लगभग 20 दिन बाद उन्हें 22 लाख रुपये का एस्टीमेट दिया जबकि उस कार की कीमत लगभग 11 लाख रुपये बताई जा रही है.

क्या है पूरा मामला

अनिरुद्ध नाम के शख्स ने लिंक्डइन पर अपने साथ हुई इस घटना की कहानी शेयर करते हुए इसे क्रोनी कैपिटलिज्म कहा. अनिरुद्ध पेशे से इंजीनियर है अमेजन में काम करते हैं.

अनिरुद्ध की फॉक्सवैगन कंपनी की पोलो TSI कार बेंगलुरु में बाढ़ की चपेट में आ गई थी. अनिरुद्ध अपनी कार को रिपेयर कराने के लिए कंपनी के सर्विस सेंटर पहुंचे थे. वर्कशॉप से 20 दिन बाद जब उन्हें सूचित किया गया तो अनिरुद्ध सर्विस सेंटर पहुंचे और उनके साथ जो हुआ उसका उन्हें अंदाजा भी नहीं था. दरअसल अनिरुद्ध को उनकी 11 लाख की कार को रिपेयर करने के बदले 22 लाख रुपये का एस्टीमेट दिया गया.

हालांकि, शख्स ने इस मामले को लेकर अपने इंश्योरेंस कंपनी से बात की, जहां कंपनी का कहना है कि कार को टोटल सॉस के रूप दिखाया जाएगा और वे कार को कलेक्ट कर लेंगे.

अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अनिरूद्ध ने ये भी बताया कि चूंकि कार खराब होने के बावजूद भी कानूनी तरीके से मेरी ही है. इसलिए जब मैं इसे कलेक्ट करने के लिए शोरूम गया तो मुझे 44,840 रुपये इस्टीमेशन चार्ज देने को कहा गया.

हालांकि ऐसे मामलों में इंडस्ट्री का सामान्य तौर पर 5 हजार रुपये चार्ज लिया जाता है. मैं बिना बिल दिए गाड़ी नहीं ले जा सकता. कुल मिलाकर 44,840 रुपये उस कार का डॉक्यूमेंट्स बनाने के लिए चार्ज किया जा रहा है, जिसकी बाजार में असल कीमत (IDV) अब मात्र 6 लाख रुपये है.

हालांकि अनिरुद्ध ने अपनी लिंक्डइन पोस्ट को अपडेट करते हुए बताया है कि फॉक्सवैगन की तरफ से उनकी प्रॉब्लम रिसॉल्व कर दी गई है.

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